वाराणसी: प्रतिबंधित समय में अवैध चिकने की दुकान पर खुलेआम बिक रही है शराब, पुलिस प्रशासन मौन, आखिर क्यों?
आदमपुर थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था पर उठ रहे गंभीर सवाल
वाराणसी अंकुर मिश्रा
वाराणसी को स्मार्ट सिटी और नशामुक्त समाज की दिशा में ले जाने की बात बड़े मंचों से खूब कही जाती है, योजनाएं बनती है नारे दिए जाते है, लेकिन जमीनी हकीकत कहीं और इशारा कर रही है। आदमपुर थाना क्षेत्र में कानून और प्रशासन दोनों की अनदेखी साफ दिख रही है, आदमपुर थाना क्षेत्र (हनुमानफाटक चौकी अंतर्गत) से महज आधा किलोमीटर दूर, गोलगड्डा चौराहे से पहले सरकारी भांग ठेका के समीप भीम (अजीत) चिकने वाले दुकान से देर रात तक खुलेआम शराब और बियर बिक रही है, नियम साफ कहते है कि निर्धारित समय के बाद बिक्री प्रतिबंधित है, लेकिन यहां किसी को इसकी परवाह नहीं। सड़क किनारे बोतले बेची जाती है और नशे का काला कारोबार धड़ल्ले से चलता रहता है सवाल यह उठता है कि जब यह सब खुलेआम हो रहा है तो पुलिस को क्यों दिखाई नहीं देता।
नशे का अड्डा और पुलिस की चुप्पी
यह कोई छिपा हुआ कारोबार नहीं है स्थानीय लोग रोजाना इसका गवाह बनते है, क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि हरे पर्दे की आड़ में भीम चिकने वाले की दुकान से देर रात शराब खरीदने वालों की भीड़ लगी रहती है,असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बढ़ रहा है, गोलगड्डा पर चिकने वाले दुकान से माहौल बिगड़ रहा है लेकिन स्थानीय पुलिस मौन है, यह मौन केवल लापरवाही ही नहीं या फिर मिलीभगत, यह बड़ा सवाल है।
जब बात खुलेआम मदिरा बिक्री की आती है तो कार्यवाही कहां गायब हो जाती है ये सब चीज ही स्थानीय लोगों के नाराजगी का कारण बन रहे है ।
दबाव, लाभ या अनदेखी?
जनता के बीच चर्चा है कि आखिर कौन से दबाव या लाभ पुलिस को रोक रहे है, क्या यह वर्दीधारियों के दायित्व के साथ विश्वासघात नहीं है, समाज को नशामुक्त बनाने की जिम्मेदारी प्रशासन की है, लेकिन उसी की चुप्पी सवालों को और गहरा कर रही है।
युवाओं का भविष्य खतरे में
आदमपुर थाना क्षेत्र के गोलगड्डा इलाके में खुलेआम रोड किनारे अजीत उर्फ भीम चिकने वाले की दुकान पर हरे पर्दे की आड़ में खुलेआम देर रात तक शराब व बियर बिक रही है, खुलेआम बिक रही शराब से क्षेत्र के युवाओं पर गलत असर पड़ रहा है, अभिभावकों का कहना है कि देर रात तक चलने वाला यह कारोबार उनके बच्चों के भविष्य को बर्बाद कर सकता है, साथ ही अपराधों में इजाफा और असामाजिक गतिविधियों के बढ़ने का भी खतरा हैं।।
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